Threshold Limit Under GST in Hindi, न्यूनत्तम राशि जहाँ से जी.एस.टी. लगना है

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Threshold Limit Under GST in Hindi, न्यूनत्तम राशि जहाँ से जी.एस.टी. लगना है. Everything you want to know about Threshold Limit in Hindi. Revised GST Law Update – Due to change in definition of aggregate turnover, turnover of non-taxable goods will not be considered for calculating the threshold limit and therefore, threshold limit of Rs. 20 lacs will consist of turnover of taxable goods and exempted goods (it is Rs. 10 lacs for North State), but will not include non-taxable goods.

 न्यूनत्तम राशि जहाँ से जी.एस.टी. लगना है:- थ्रेशहोल्ड लिमिट 

बिक्री या सेवा की वह न्यूनत्तम राशि जहाँ से जी.एस.टी. के तहत कर लगना है वह राशि केंद्र एवं राज्यों को तय करनी है और अभी तक जो समाचार आ रहें है उनके अनुसार यह राशि केवल 20.00 लाख रुपये होगी लेकिन  हो सकता है अंतिम समय में इसमें कोई परिवर्तन हो.  इस राशि को ही “थ्रेशहोल्ड लिमिट” कहा जाता है. देखिये इस समय अधिकांश राज्यों में यह सीमा वेट के लिए 10.00 लाख रुपये है लेकिन कुछ राज्यों में अभी भी यह सीमा 5.00 लाख रुपये है . सेवा कर के लिए भी छोटे सेवा प्रदाताओ के लिए यह सीमा इस समय 10 लाख रुपये है .

लेकिन असली समस्या तो केन्द्रीय उत्पाद शुल्क को लेकर है जहां यह सीमा 150 लाख रुपये है लेकिन सी.जी.एस.टी. के तहत यह सीमा भी अब 20  लाख (या जो भी अंतिम रूप से तय हो ) रुपये रहने की  संभावना है .

अंतिम रूप से क्या होता है यह तो जी.एस.टी. का कानून जब अंतिम रूप से बनेगा और जी.एस.टी. जब लागू होगा तभी ज्ञात हो पायेगा लेकिन अभी हम समझने के लिए इसे बीस लाख रूपये मान लें तो यह वह सीमा होगी जिसके ऊपर के डीलर्स को अनिवार्य रूप से जी.एस.टी. भुगतान करना होगा.

केन्द्रीय उत्पाद शुल्क की जगह जो नया कर जी.एस.टी. के तहत “सी.जी.एस.टी.” के नाम से लाया जा रहा है उसमे यह कहा जाता रहा है केंद्र राज्यों के मुकाबले वित्तीय रूप से और भी मजबूत हो जाएगा उसका सबसे बड़ा कारण एक तो यह “थ्रेशहोल्ड लिमिट” क्यों कि अब यह 150 रूपये से घाट कर  20 लाख रूपये होने वाली है   एवं दूसरा यह तथ्य है कि अब केंद्र माल के  निर्माण की अवस्था की जगह बिक्री की अवस्था पर प्रत्यक्ष कर के रूप में सी.जी.एस.टी. की वसूली करेगा.

यहाँ यह ध्यान रखें  कि देश के बहुत से लघुउद्योग अभी भी इसी 150 लाख रूपये के केन्द्रीय उत्पाद कर के सरंक्षण के कारण अपना एक स्वयं का बाज़ार स्थानीय स्तर पर खडा किये हुए है लेकिन जी.एस.टी. के दौरान यह सरंक्षण समाप्त होने के कारण उन्हें भी बड़े उद्योगों के बराबर ही कर देना होगा. “एक कर एक बाजार”की यह सोच जिसके तहत जी.एस.टी. लगाया जा रहा है वह इन लघु उद्योगों के लिए संकट का कारण बन सकती है और बड़े उद्योगों के साथ प्रतिस्पर्धा में उन्हें अपना अस्तित्व बचाए रख पाना कुछ मुश्किल जरुर होगा.

 

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Section 25 of IGST – Removal of difficulties

Section 47 of GST – Levy of late fee

 

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