GST से पहले कर लें ये 10 काम, वरना 1 जुलाई के बाद हो जाएगी मुश्किल

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GST से पहले कर लें ये 10 काम, वरना 1 जुलाई के बाद हो जाएगी मुश्किल

GST से पहले कर लें ये 10 काम, वरना 1 जुलाई के बाद हो जाएगी मुश्किल: केंद्र सरकार 1 जुलाई से जीएसटी को लागू करने की पूरी तैयारी कर चुकी है। 30 जून की रात से ही इस नई टैक्‍स पॉलिसी को लागू करने के लिए कार्यक्रम शुरू हो जाएगा। ऐसे में इस नई टैक्‍स नीति के लागू होने के बाद आपको कोई परेशानी न हो, इसके लिए आप 1 जुलाई से पहले ही कुछ चीजें पूरी कर लें।

एक जुलाई से लागू होने वाले जीएसटी से देश में कई अहम बदलाव होंगे। जिसका फायदा कारोबारियों, विदेशी निवेशकों से लेकर आम-आदमी तक को मिलेगा। वित्त मंत्रालय के रेवेन्यु सेक्रेटरी हसमुख अढिया का ऐसा कहना है। उनके अनुसार जीएसटी के जरिए देश की एफिशिएंसी में इजाफा होगा। जिससे कंपनियों की प्रॉफिटिबिलिटी से लेकर नई नौकरियों तक के अवसर पैदा होंगे। जीएसटी किस तरह से इकोनॉमी को रफ्तार देगा, साथ ही कारोबारियों की जो अभी भी चिंताएं बची हुई है,

हम आपको 10 ऐसी चीजों के बारे में बता रहे हैं, जिन्‍हें पूरा करने के बाद आपको जीएसटी लागू होने से कोई परेशानी नहीं होगी। क्‍योंकि इन चीजों को करने के बाद आप इस नई टैक्‍स नीति के लिए पूरी तरह तैयार रहेंगे। अगर आप इन कामों को नहीं करेंगे, तो कई मुश्किलें आपके सामने खड़ी हो सकती हैं।

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GST से पहले कर लें ये 10 काम, वरना 1 जुलाई के बाद हो जाएगी मुश्किल

जीएसटी के लिए करें पंजीकरण

जीएसटी के बाद आने वाले नए कानून के तहत उत्पाद और सेवाओं से जुड़े सारी कंपनियों को उन राज्यों में पंजीकृत करना होगा, जहाँ से अपनी उत्पाद और सेवाओं का आपूर्ति करेंगी। मौजूदा क़ानून के तहत किसी भी राज्य में पंजीकृत एंटिटी को जीएसटी शासन में लाना होगा। जो एंटिटी अभी तक पंजीकृत नहीं है उनको, उन विशिष्ट राज्यों में पंजीकृत होना होगा जहां से वो आपूर्ति करती है।

इनवॉइस जारी करने के लिए अपने आईटी सिस्टम को तैयार करें

पहले दिन से ही सही इनवॉइस जारी करने क लिए मौजूदा आई टी यसुतेम में कुछ अहम बदलाव करने होंगे। इनवॉइस के प्रारूप को भी जीएसटी के मुताबिक़ बदलना होगा। इसके अलावा जीएसटीआईएन के अनुसार, ग्राहक सम्बंधित डाटा के साथ ही नया टैक्स कोड एवं शर्तें को भी आईटी सिस्टम में अपडेट करना होगा।

GST में भरने होंगे ये फॉर्म

काम : अपने सप्‍लायर्स और क्रेडिटर्स से 31 मार्च, 2017 को खत्‍म्‍ हुए साल के अकाउंट स्‍टेटमेंट ले लें और इन्‍हें अपनी अकाउंट बुक्‍स से मैच कर लें।

फायदा : इससे आपके अकाउंट का ब्‍यौरा क्लियर रहेगा और जीएसटी को अपनाने में दिक्‍कत नहीं होगी।

काम : परचेसिंग की अपनी सभी रिपोर्ट्स की जांच कर लें और किसी भी तरह के मिसमैच को क्लियर कर दें।

फायदा :  कोई मिसमैच अगर नजर आता है, तो आप समय रहते वैट रिटर्न्‍स को वेरीफाई कर सकते हैं

काम : वित्‍त वर्ष 2016-17 के लिए अपनी अकाउंट बुक्‍स को फाइनल कर लें।

फायदा : आपके रिकॉर्ड क्लियर रहेंगे, तो जीएसटी की सभी नियम व शर्तों को अपनाने में आपको दिक्‍कत नहीं होगी।

काम : अपने सभी सप्‍लायर्स और बायर्स का GSTIN/ ARN प्राप्‍त कर लें और सभी को अपना GSTIN/ ARN दे दें।

फायदा : जीएसटी के लागू होने के बाद बिजनेस करने में कोई परेशानी नहीं आएगी।

काम : अपने अकाउंटेंट्स को जीएसटी अकाउंटिंग और रिटर्न फॉरमैट्स के लिए तैयार कर दें।

फायदा : इससे जीएसटी लागू होने के बाद काम में कोई दिक्‍कत नहीं आएगी।

काम : क्रेडिट और डेबिट से जुड़े अपने सारे डॉक्‍युमेंट्स को तैयार रखें।

फायदा : जीएसटी के बाद इनकी आपको जरूरत पड़ सकती है।

काम :  – आपका जो स्‍टॉक 30 जून तक बिकेगा नहीं, उसकी अलग से फाइलिंग तैयार रखें। इनके परचेस बिल्‍स, बिल्‍स ऑफ एंट्री, एक्‍साइज पेइंग डॉक्‍यूमेंट्स को एक साथ रखें

फायदा : इनपुट क्रेडिट टैक्‍स क्‍लेम करने में दिककत नहीं होगी।

काम : अपने स्‍टॉक को टैक्‍स रेट और परचेस वाइज क्‍लासिफाई कर लें।

फायदा : एसजीएसटी के तहत इनकम टैक्‍स क्रेडिट हासिल करने में आसानी होगी।

काम : 31 मार्च और 30 जून तक के स्‍टॉक का डिटेल ब्‍यौरा तैयार कर लें।

फायदा : जीएसटी के बाद इस ब्‍यौरे की आपकी हर कदम पर जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में किसी भी परेशानी से बचने के लिए यह जरूरी है।

काम :जीएसटी कंसलटंट्स की मदद लें

फायदा : ऊपर दी गई तैयारियों के बावजूद आपके अपने बिजनेस के हिसाब से कोई और तैयारी तो नहीं करनी पड़ेगी, इस काम में जीएसटी कंसलटंट्स आपको गाइड कर सकते हैं

अपने बिज़नेस प्रक्रिया को रिवाइज़ और अपडेट करें

मौजूदा सिस्टम के तहत टैक्स को गुड्स के निर्माण या बिक्री और सेवाओं के प्रावधान पर लगाया जा रहा है, इसी गुड्स एवं सर्विसेज की आपूर्ति पर जीएसटी लगाया जाएगा। ऐसे ही कई अन्य संशोधन है जैसे कि पंजीकरण न किए गए विक्रेताओं से खरीदे जाने के मामले में स्वयं-चालान, सामानों के लिए भुगतान के मामले में क्रेडिट का रिवर्सल, आदि। क़ानून में ऐसे संशोधन विभिन्न बिज़नेस प्रक्रियाओं में परिवर्तन और संस्थाओं के लिए इन के प्रभाव का आकलन करने और आवश्यकतानुसार प्रक्रियाओं को बदलने के लिए जरूरी है।

सवाल—आजादी के बाद का सबसे बड़ा इनडायरेक्ट टैक्स रिफॉर्म GSTलागू होने जा रहा है, ये कैसे देश की इकोनॉमी को नए लेवल पर ले जाएगा

जवाब- किसी भी देश की टैक्स प्रणाली सिंपल होनी चाहिए। वहां ज्यादा टैक्स नहीं होना चाहिए। जीएसटी इस दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है। अभी तक देश में केंद्र, राज्य सरकार को टैक्स के अलावा कई तरह के सेस भी लगते थे। जीएसटी के बाद यह खत्म हो जाएंगे। इसका देश के व्यापारियों, उद्योगपतियों, विदेशी निवेशकों सभी को फायदा मिलेगा। देश में बिजनेस करना आसान होगा। कंपनियों की प्रॉफिटिबिलिटी बढ़ेगी। जिससे पूरे इकोनॉमिक सिस्टम को मजबूती मिलेगी। इसका असर नई नौकरियों के अवसर से लेकर देश में खुशहाली के रूप में दिखेगा। एक हद तक देश में वन टैक्स वन नेशन की ढांचा तैयार होगा।

सवाल- जीएसटी लागू होने में अब कुछ ही दिन बचें हैं। ऐसे समय में कारोबारी रिवर्स चार्ज, इन्पुट क्रेडिट और टैक्स रेट को लेकर कई डिमांड कर रहे हैं। इसे देखते हुए क्या कोई बदलाव की गुंजाइश है

जवाब- अभी तो जीएसटी रोलआउट की तैयारी है। अगर किसी तरह की बहुत मुश्किल होने वाली है। साथ ही ऐसा कोई आयटम जिस पर विचार करना बहुत जरूरी है तो जीसएटी काउंसिल उस पर गौर कर सकती है। कुल मिलाकर विशेष परिस्थिति में ही कुछ बदलाव हो सकते है। लेकिन ऐसा तो बिल्कुल नहीं है कि काउंसिल हर रोज रिव्यू करेगी।

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